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घर के किस दिशा में शीशा रखना शुभ अशुभ, जाने क्या कहता है वास्तु शास्त्र

वास्तु शास्त्र घर में सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह और नकारात्मक ऊर्जा को कम करने के लिए दिशाओं के महत्व को बताता है. शीशा लगाते समय भी दिशा का ध्यान रखना ज़रूरी होता है. वास्तु के अनुसार कुछ खास दिशाओं में शीशा लगाने से शुभ फल मिलते हैं, वहीं कुछ दिशाओं में लगाना अशुभ माना जाता है. आइए विस्तार से जानें कि घर में शीशा लगाने के लिए कौन सी दिशाएं शुभ हैं और किन दिशाओं से बचना चाहिए.

घर के किस दिशा में शीशा रखना शुभ अशुभ, जाने क्या कहता है वास्तु शास्त्र

घर में शीशे रखने के लिए शुभ दिशाएं

  • उत्तर दिशा: वास्तु शास्त्र में उत्तर दिशा को धन के देवता कुबेर की दिशा माना जाता है. इस दिशा में शीशा लगाने से घर में धन-दौलत का आगमन होता है और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है. आप इस दिशा में कमरे की दीवार पर शीशा लगा सकते हैं, जिससे कि आपका चेहरा उत्तर की ओर रहते हुए शीशे में दिखाई दे.
  • पूर्व दिशा: सूर्योदय की दिशा मानी जाने वाली पूर्व दिशा को देवताओं की दिशा माना जाता है. इस दिशा में शीशा लगाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ता है और शुभता आती है. पूर्व दिशा की दीवार पर लगा शीशा सुबह की सकारात्मक ऊर्जा को घर में प्रतिबिंबित करने में सहायक होता है.
  • ईशान कोण: ईशान कोण को भगवान शिव की दिशा माना जाता है. वास्तु के अनुसार इस दिशा में शीशा लगाने से ज्ञान, बुद्धि और विद्या में वृद्धि होती है. साथ ही, इससे आध्यात्मिक उन्नति भी संभव है.

अशुभ दिशाएं शीशे के लिए

  • दक्षिण दिशा: यम देव की दिशा मानी जाने वाली दक्षिण दिशा में शीशा लगाना अशुभ माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ सकता है.
  • पश्चिम दिशा: वरुण देव की दिशा मानी जाने वाली पश्चिम दिशा में शीशा लगाने से धन हानि हो सकती है और व्यापार में परेशानी आ सकती है.
  • आग्नेय कोण: वास्तु में आग्नेय कोण को अग्नि देव की दिशा मानी जाती है. इस दिशा में शीशा लगाने से अग्नि दुर्घटना का खतरा बढ़ सकता है.
  • वायव्य कोण: वायु देव की दिशा मानी जाने वाले वायव्य कोण में शीशा लगाने से सेहत संबंधी समस्याएं हो सकती हैं.
  • नैऋत्य कोण: राहु की दिशा मानी जाने वाले नैऋत्य कोण में शीशा लगाने से घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ सकता है.

अन्य महत्वपूर्ण बातें

  • शीशा हमेशा साफ रखना चाहिए. धुंधले या टूटे हुए शीशे में अपना चेहरा देखना अशुभ माना जाता है. टूटे हुए शीशे को तुरंत हटा देना चाहिए.
  • शीशा कभी भी बिस्तर के ठीक सामने नहीं लगाना चाहिए. इससे रात की नींद में खलल पड़ सकती है.
  • मुख्य द्वार के सामने भी शीशा नहीं लगाना चाहिए.
  • शीशा पूजा स्थल में नहीं लगाना चाहिए.

वास्तु शास्त्र एक मार्गदर्शक सिद्धांत है. आप अपनी सुविधा और आवश्यकता के अनुसार शीशा लगा सकते हैं. अगर आपको शीशा लगाने में कोई संदेह है, तो किसी वास्तु विशेषज्ञ से सलाह ले सकते हैं.

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पूछे जाने वाले प्रश्न

घर में शीशा लगाने से क्या फायदे होते हैं?

वास्तु शास्त्र के अनुसार, सही दिशा में लगाया गया शीशा घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ा सकता है. उत्तर और पूर्व दिशा में लगा शीशा धन-दौलत, सकारात्मकता और शुभता लाने में मदद करता है. वहीं, ईशान कोण में लगा शीशा ज्ञान, बुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करने वाला माना जाता है.

घर में कौन सी दिशा में शीशा नहीं लगाना चाहिए?

दक्षिण, पश्चिम, आग्नेय, वायव्य और नैऋत्य कोण को शीशा लगाने के लिए अशुभ माना जाता है. दक्षिण दिशा में शीशा लगाने से नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ सकता है, वहीं पश्चिम दिशा में धन हानि और व्यापार में परेशानी आने की संभावना रहती है. आग्नेय कोण में अग्नि दुर्घटना का खतरा, वायव्य कोण में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और नैऋत्य कोण में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ने का खतरा बताया गया है.

टूटे हुए शीशे को वास्तु के अनुसार क्या करना चाहिए?

वास्तु शास्त्र में टूटे हुए शीशे को अशुभ माना जाता है. टूटा हुआ शीशा घर में नकारात्मक ऊर्जा का संकेत देता है. इसलिए, किसी भी टूटे हुए शीशे को जल्द से जल्द घर से बाहर निकाल देना चाहिए. टूटे हुए शीशे में अपना चेहरा देखना भी अशुभ माना जाता है.

वास्तु के अनुसार शीशे की साफ-सफाई का क्या महत्व है?

वास्तु शास्त्र में शीशे की साफ-सफाई का बहुत महत्व है. धुंधला या गंदा शीशा नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है. इसीलिए, शीशे को हमेशा साफ रखना चाहिए. नियमित रूप से शीशे की सफाई करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है.

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